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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.72.6 
आर्यकस्ते सुकुशली युधाजिन्मातुलस्तव।
प्रवासाच्च सुखं पुत्र सर्वं मे वक्तुमर्हसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘क्या तुम्हारे नाना कुशल से हैं? क्या तुम्हारे चाचा युधाजित कुशल से हैं? बेटा! यहाँ से जाने के बाद से क्या तुम सुखी रहे हो? ये सब बातें मुझे बताओ।’॥6॥
 
‘Is your maternal grandfather well? Is your uncle Yudhajit well? Son! Have you been happy since you left here? Tell me all these things.’॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)