Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.72.54: अतः हे पुत्र! अब तुम कर्मकाण्ड में पारंगत वसिष्ठ आदि श्रेष्ठ ब्राह्मणों की सहायता से इस उदार हृदय वाले महाराज का अन्तिम संस्कार करो और फिर इस पृथ्वी के राजा के रूप में अपना अभिषेक कराओ। ॥54॥ | ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः हे पुत्र! अब तुम कर्मकाण्ड में पारंगत वसिष्ठ आदि श्रेष्ठ ब्राह्मणों की सहायता से इस उदार हृदय वाले महाराज का अन्तिम संस्कार करो और फिर इस पृथ्वी के राजा के रूप में अपना अभिषेक कराओ। ॥54॥
"Therefore, my son! Now, with the help of prominent Brahmins like Vasishtha, who are well versed in the rituals, perform the last rites of this generous-hearted Maharaja and then get yourself anointed as the king of this earth." ॥ 54॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे द्विसप्ततितम: सर्ग:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें बहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥