श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.72.53 
मा शोकं मा च संतापं धैर्यमाश्रय पुत्रक।
त्वदधीना हि नगरी राज्यं चैतदनामयम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
'बेटा! शोक और उदासी मत करो, धैर्य रखो। अब यह नगर और यह संकट-मुक्त राज्य तुम्हारे अधीन है।'
 
‘Son! Do not grieve and be sad, be patient. Now this city and this trouble-free kingdom are under your control.
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