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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  2.72.50-51 
स स्ववृत्तिं समास्थाय पिता ते तत् तथाकरोत्।
रामस्तु सहसौमित्रि: प्रेषित: सह सीतया॥ ५०॥
तमपश्यन् प्रियं पुत्रं महीपालो महायशा:।
पुत्रशोकपरिद्यून: पञ्चत्वमुपपेदिवान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
'अपने सत्यनिष्ठ स्वभाव के अनुसार उन्होंने मेरी माँग पूरी की। श्री राम को लक्ष्मण और सीता सहित वन में भेज दिया गया, फिर अपने प्रिय पुत्र श्री राम को न देखकर वे महायशस्वी महाराज पुत्रशोक से व्याकुल होकर परलोकवासी हो गए। 50-51॥
 
'According to his truthful nature, he fulfilled my demand. Shri Ram was sent to the forest along with Lakshman and Sita, then after not seeing his beloved son Shri Ram, the great and famous Maharaj became a resident of the other world due to grief over his son. 50-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)