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ramayan 2.72.5: ‘बेटा! तुम्हें अपने नाना के घर से निकले हुए कितनी रातें बीत गई हैं? तुम रथ द्वारा बहुत शीघ्रता से आए हो। क्या तुम मार्ग में बहुत थके नहीं थे?॥5॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.72.5 
अद्य ते कतिचिद् रात्र्यश्च्युतस्यार्यकवेश्मन:।
अपि नाध्वश्रम: शीघ्रं रथेनापततस्तव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! तुम्हें अपने नाना के घर से निकले हुए कितनी रातें बीत गई हैं? तुम रथ द्वारा बहुत शीघ्रता से आए हो। क्या तुम मार्ग में बहुत थके नहीं थे?॥5॥
 
‘Son! How many nights have passed since you left your maternal grandfather's house? You have come very quickly by chariot. Were you not very tired on the way?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)