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ramayan 2.72.48: ‘पुत्र! श्री राम ने किसी भी कारण से कभी किसी ब्राह्मण का थोड़ा-सा भी धन नहीं चुराया। उन्होंने कभी किसी निरपराध धनी या निर्धन व्यक्ति का वध नहीं किया। श्री राम कभी किसी पराई स्त्री पर दृष्टि नहीं डालते।॥ 48॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.72.48 
न ब्राह्मणधनं किंचिद्‍धृतं रामेण कस्यचित्।
कश्चिन्नाढॺो दरिद्रो वा तेनापापो विहिंसित:।
न राम: परदारान् स चक्षुर्भ्यामपि पश्यति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! श्री राम ने किसी भी कारण से कभी किसी ब्राह्मण का थोड़ा-सा भी धन नहीं चुराया। उन्होंने कभी किसी निरपराध धनी या निर्धन व्यक्ति का वध नहीं किया। श्री राम कभी किसी पराई स्त्री पर दृष्टि नहीं डालते।॥ 48॥
 
‘Son! For any reason, Shri Ram has never stolen even a little bit of wealth from a Brahmin. He has never killed any innocent rich or poor person. Shri Ram never casts his eyes on any other woman.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)