Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.72.46: तब भरत की माता कैकेयी, जो चंचल स्वभाव की थीं, अपने चंचल स्त्री स्वभाव और बुद्धि से रहित होने के कारण अपने कर्मों का विस्तारपूर्वक वर्णन करने लगीं।   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.72.46 
अथास्य चपला माता तत् स्वकर्म यथातथम्।
तेनैव स्त्रीस्वभावेन व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तब भरत की माता कैकेयी, जो चंचल स्वभाव की थीं, अपने चंचल स्त्री स्वभाव और बुद्धि से रहित होने के कारण अपने कर्मों का विस्तारपूर्वक वर्णन करने लगीं।
 
Then Bharat's mother Kaikeyi, who was of a fickle nature, started describing her deeds in detail due to her fickle womanly nature and devoid of wisdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)