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ramayan 2.72.45: क्या राजकुमार श्री राम का हृदय किसी अन्य स्त्री की ओर आ गया है? किस अपराध के कारण भाई श्री राम को दण्डकारण्य में निर्वासित किया गया है?॥ 45॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.72.45 
कच्चिन्न परदारान् वा राजपुत्रोऽभिमन्यते।
कस्मात् स दण्डकारण्ये भ्राता रामो विवासित:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
क्या राजकुमार श्री राम का हृदय किसी अन्य स्त्री की ओर आ गया है? किस अपराध के कारण भाई श्री राम को दण्डकारण्य में निर्वासित किया गया है?॥ 45॥
 
‘Has Prince Shri Ram's heart turned towards some other woman? For what crime has brother Shri Ram been exiled to Dandakaranya?'॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)