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ramayan 2.72.44: 'माँ! क्या श्री राम ने किसी कारणवश ब्राह्मण का धन चुराया था? क्या उन्होंने किसी निरपराध धनी या निर्धन व्यक्ति का वध किया था?॥ 44॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.72.44 
कच्चिन्न ब्राह्मणधनं हृतं रामेण कस्यचित्।
कच्चिन्नाढॺो दरिद्रो वा तेनापापो विहिंसित:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
'माँ! क्या श्री राम ने किसी कारणवश ब्राह्मण का धन चुराया था? क्या उन्होंने किसी निरपराध धनी या निर्धन व्यक्ति का वध किया था?॥ 44॥
 
‘Ma! Did Shri Ram steal the wealth of a Brahmin for some reason? Did he kill an innocent rich or poor person?॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)