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ramayan 2.72.43: यह सुनकर भरत भयभीत हो गए। उन्हें अपने भाई के चरित्र पर संदेह होने लगा। (वे सोचने लगे- क्या श्री राम धर्म से च्युत हो गए हैं?) अपने वंश (धर्म परायणता) के महत्व को स्मरण करके वे कैकेयी से इस प्रकार पूछने लगे-॥43॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.72.43 
तच्छ्रुत्वा भरतस्त्रस्तो भ्रातुश्चारित्रशङ्कया।
स्वस्य वंशस्य माहात्म्यात् प्रष्टुं समुपचक्रमे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भरत भयभीत हो गए। उन्हें अपने भाई के चरित्र पर संदेह होने लगा। (वे सोचने लगे- क्या श्री राम धर्म से च्युत हो गए हैं?) अपने वंश (धर्म परायणता) के महत्व को स्मरण करके वे कैकेयी से इस प्रकार पूछने लगे-॥43॥
 
Hearing this, Bharata became afraid. He started doubting his brother's character. (He started thinking- Has Shri Ram fallen from Dharma?) Remembering the importance of his dynasty (devotion to Dharma), he started asking Kaikeyi in this manner-॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)