Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.72.41: इस प्रकार पूछने पर उनकी माता कैकेयी ने मधुर बुद्धि से युक्त होकर उन्हें अप्रिय सन्देश उसी समय उचित रीति से सुनाना आरम्भ कर दिया-॥41॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.72.41 
तथा पृष्टा यथान्यायमाख्यातुमुपचक्रमे।
मातास्य युगपद्वाक्यं विप्रियं प्रियशंसया॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूछने पर उनकी माता कैकेयी ने मधुर बुद्धि से युक्त होकर उन्हें अप्रिय सन्देश उसी समय उचित रीति से सुनाना आरम्भ कर दिया-॥41॥
 
On being asked in this manner, his mother Kaikeyi simultaneously began narrating the unpleasant message to him in an appropriate manner with sweet wisdom -॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)