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ramayan 2.72.4: कैकेयी ने अपने यशस्वी पुत्र भरत को गले लगाया, उसका सिर सूंघा, उसे गोद में बिठाया और प्रश्न पूछने लगीं-॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.72.4 
तं मूर्ध्नि समुपाघ्राय परिष्वज्य यशस्विनम्।
अङ्के भरतमारोप्य प्रष्टुं समुपचक्रमे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी ने अपने यशस्वी पुत्र भरत को गले लगाया, उसका सिर सूंघा, उसे गोद में बिठाया और प्रश्न पूछने लगीं-॥4॥
 
Kaikeyi embraced her illustrious son Bharat, smelt his head, sat him on her lap and began to ask questions -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)