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ramayan 2.72.35-36: भरत के पूछने पर कैकेयी ने उन्हें सब कुछ विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, "पुत्र! तुम्हारे पिता, जो सभी ज्ञानियों में श्रेष्ठ थे, 'हे राम! हे सीता! हे लक्ष्मण!' कहते हुए परलोक चले गए।"   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  2.72.35-36 
इति पृष्टा यथातत्त्वं कैकेयी वाक्यमब्रवीत्॥ ३५॥
रामेति राजा विलपन् हा सीते लक्ष्मणेति च।
स महात्मा परं लोकं गतो मतिमतां वर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भरत के पूछने पर कैकेयी ने उन्हें सब कुछ विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, "पुत्र! तुम्हारे पिता, जो सभी ज्ञानियों में श्रेष्ठ थे, 'हे राम! हे सीता! हे लक्ष्मण!' कहते हुए परलोक चले गए।"
 
When Bharata asked her this, Kaikeyi told him everything in detail. She said, "Son! Your great father, the greatest of all wise men, went to the other world lamenting, 'Oh Rama! Oh Sita! Oh Lakshman!'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)