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ramayan 2.72.32: अब तुम शीघ्र ही भगवान् राम को, जो मेरे भाई, पिता और सम्बन्धी हैं और जिनका मैं परम प्रिय सेवक हूँ, मेरे आगमन की सूचना दो, जो बिना किसी प्रयास के ही महान वीर हैं॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.72.32 
यो मे भ्राता पिता बन्धुर्यस्य दासोऽस्मि सम्मत:।
तस्य मां शीघ्रमाख्याहि रामस्याक्लिष्टकर्मण:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अब तुम शीघ्र ही भगवान् राम को, जो मेरे भाई, पिता और सम्बन्धी हैं और जिनका मैं परम प्रिय सेवक हूँ, मेरे आगमन की सूचना दो, जो बिना किसी प्रयास के ही महान वीर हैं॥ 32॥
 
'Now you should quickly inform Lord Rama, who is my brother, father and relative and whose most beloved servant I am, of my arrival, who is a great hero without any effort.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)