Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.72.31: 'हाय! मेरे पिता का वह कोमल हाथ कहाँ है, जो अनायास ही महान् कर्म करते थे, जिनका स्पर्श मुझे इतना सुख देता था? उसी हाथ से वे मेरे धूलियुक्त शरीर को बार-बार पोंछते थे॥ 31॥ | ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्व स पाणि: सुखस्पर्शस्तातस्याक्लिष्टकर्मण:।
यो हि मां रजसा ध्वस्तमभीक्ष्णं परिमार्जति॥ ३१॥
अनुवाद
'हाय! मेरे पिता का वह कोमल हाथ कहाँ है, जो अनायास ही महान् कर्म करते थे, जिनका स्पर्श मुझे इतना सुख देता था? उसी हाथ से वे मेरे धूलियुक्त शरीर को बार-बार पोंछते थे॥ 31॥
'Alas! Where is that soft hand of my father, who performed great deeds without any effort, whose touch was so soothing to me? With that very hand he used to wipe my dusty body again and again.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥