Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.72.30: ‘निश्चय ही मेरे पूज्य पिता, यशस्वी महाराज को मेरे यहाँ आने का कुछ पता नहीं है; अन्यथा वे शीघ्र ही झुककर प्रेमपूर्वक मेरा सिर सूँघ लेते॥30॥ | ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘निश्चय ही मेरे पूज्य पिता, यशस्वी महाराज को मेरे यहाँ आने का कुछ पता नहीं है; अन्यथा वे शीघ्र ही झुककर प्रेमपूर्वक मेरा सिर सूँघ लेते॥30॥
‘Surely my revered father, the glorious Maharaja, has no idea about my arrival here; otherwise he would have quickly bent down and smelled my head lovingly.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥