Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.72.16-17: भरत धर्मात्मा कुल में उत्पन्न हुए थे और उनका हृदय पवित्र था। माता के वचन सुनते ही वे पिता के शोक से अत्यन्त व्याकुल होकर सहसा भूमि पर गिर पड़े और ‘हाय! मैं मर गया!’ ऐसा अत्यन्त करुण और दुःखपूर्ण वचन कहकर रोने लगे। वीर और पराक्रमी भरत बार-बार अपनी भुजाएँ भूमि पर पटकते हुए गिरकर लोटने लगे॥16-17॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  2.72.16-17 
तच्छ्रुत्वा भरतो वाक्यं धर्माभिजनवाञ्छुचि:।
पपात सहसा भूमौ पितृशोकबलार्दित:॥ १६॥
हा हतोऽस्मीति कृपणां दीनां वाचमुदीरयन्।
निपपात महाबाहुर्बाहू विक्षिप्य वीर्यवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरत धर्मात्मा कुल में उत्पन्न हुए थे और उनका हृदय पवित्र था। माता के वचन सुनते ही वे पिता के शोक से अत्यन्त व्याकुल होकर सहसा भूमि पर गिर पड़े और ‘हाय! मैं मर गया!’ ऐसा अत्यन्त करुण और दुःखपूर्ण वचन कहकर रोने लगे। वीर और पराक्रमी भरत बार-बार अपनी भुजाएँ भूमि पर पटकते हुए गिरकर लोटने लगे॥16-17॥
 
Bharata was born in a religious family and his heart was pure. On hearing his mother's words, he suddenly fell on the ground, extremely distressed with grief for his father, and started crying, 'Alas, I am dead!' saying these very pitiful and sorrowful words. The valiant and powerful Bharata started falling and rolling, repeatedly slamming his arms on the ground.॥16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)