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ramayan 2.72.13: मैं तुमसे पूछता हूँ, बताओ, पिताजी कहाँ हैं? मैं उनके चरण पकड़ूँगा। या वे बड़ी माता कौशल्या के घर में नहीं हैं?॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.72.13 
पितुर्ग्रहीष्ये पादौ च तं ममाख्याहि पृच्छत:।
आहोस्विदम्बाज्येष्ठाया: कौसल्याया निवेशने॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मैं तुमसे पूछता हूँ, बताओ, पिताजी कहाँ हैं? मैं उनके चरण पकड़ूँगा। या वे बड़ी माता कौशल्या के घर में नहीं हैं?॥13॥
 
‘I ask you, tell me, where is father? I will hold his feet. Or is he not in the house of elder mother Kausalya?’॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)