Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.72.12: महाराज (पिताजी) माँ के महल में रहते थे, पर आज वे मुझे यहाँ दिखाई नहीं दे रहे। मैं उनके दर्शन की इच्छा से यहाँ आया हूँ।   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.72.12 
राजा भवति भूयिष्ठमहाम्बाया निवेशने।
तमहं नाद्य पश्यामि द्रष्टुमिच्छन्निहागत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाराज (पिताजी) माँ के महल में रहते थे, पर आज वे मुझे यहाँ दिखाई नहीं दे रहे। मैं उनके दर्शन की इच्छा से यहाँ आया हूँ।
 
‘Maharaj (father) used to stay in mother's palace, but today I don't see him here. I have come here with the desire to see him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)