Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.71.44: अपने सारथी से ऐसा कहकर भरत अयोध्या में घटित हो रहे अशुभ संकेतों से दुःखी होकर राजमहल में चले गये।   |   ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.71.44 
इत्येवमुक्त्वा भरत: सूतं तं दीनमानस:।
तान्यनिष्टान्ययोध्यायां प्रेक्ष्य राजगृहं ययौ॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अपने सारथी से ऐसा कहकर भरत अयोध्या में घटित हो रहे अशुभ संकेतों से दुःखी होकर राजमहल में चले गये।
 
Having said this to his charioteer, Bharata, saddened by the ominous signs that were occurring in Ayodhya, went to the royal palace. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)