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ramayan 2.71.1-2: राजमहल से निकलकर महाबली भरत पूर्व दिशा की ओर चल पड़े। उस तेजस्वी राजकुमार ने मार्ग में सुदामा नदी देखी और उसे पार कर लिया। तत्पश्चात इक्ष्वाकुनंदन भगवान भरत ने ह्रादिनी नदी को पार किया, जिसके तट दूर-दूर तक फैले हुए थे, तथा पश्चिम की ओर बहने वाली शतद्रु नदी (सतलज) को पार किया। 1-2॥   |   ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  2.71.1-2 
स प्राङ्मुखो राजगृहादभिनिर्याय वीर्यवान्।
तत: सुदामां द्युतिमान् संतीर्यावेक्ष्य तां नदीम्॥ १॥
ह्रादिनीं दूरपारां च प्रत्यक्स्रोतस्तरङ्गिणीम्।
शतद्रुमतरच्छ्रीमान् नदीमिक्ष्वाकुनन्दन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजमहल से निकलकर महाबली भरत पूर्व दिशा की ओर चल पड़े। उस तेजस्वी राजकुमार ने मार्ग में सुदामा नदी देखी और उसे पार कर लिया। तत्पश्चात इक्ष्वाकुनंदन भगवान भरत ने ह्रादिनी नदी को पार किया, जिसके तट दूर-दूर तक फैले हुए थे, तथा पश्चिम की ओर बहने वाली शतद्रु नदी (सतलज) को पार किया। 1-2॥
 
Coming out of the royal palace, the mighty Bharata moved towards the east. That brilliant prince saw the Sudama river on the way and crossed it. After that, Ikshvakunandan, Lord Bharat, crossed the Hradini river, whose shores were spread far and wide, and crossed the west-flowing Shatadru river (Sutlej). 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)