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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना
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श्लोक 9
श्लोक
2.70.9
कच्चित् सुमित्रा धर्मज्ञा जननी लक्ष्मणस्य या।
शत्रुघ्नस्य च वीरस्य अरोगा चापि मध्यमा॥ ९॥
अनुवाद
‘क्या मेरी मध्यमा माता, पुण्यात्मा सुमित्रा, वीर लक्ष्मण और शत्रुघ्न की माता, स्वस्थ और प्रसन्न हैं?॥9॥
‘Is my middle mother, the virtuous Sumitra, the mother of the brave Lakshmana and Shatrughna, healthy and happy?॥ 9॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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