श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.70.8 
आर्या च धर्मनिरता धर्मज्ञा धर्मवादिनी।
अरोगा चापि कौसल्या माता रामस्य धीमत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'धर्म को जानने वाली और धर्म की बातें करने वाली बुद्धिमान श्री राम की माता, धर्मनिष्ठ आर्या कौसल्या को क्या कोई रोग या पीड़ा नहीं होती? 8॥
 
'The devout Arya Kausalya, the intelligent Shri Ram's mother who knows religion and talks about religion, does not have any disease or pain? 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd