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ramayan 2.70.4: 'बड़े नेत्रों वाले राजकुमार! कृपया इन बहुमूल्य वस्त्रों और आभूषणों को स्वयं स्वीकार करें और अपने मामा को भी दें।॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.70.4 
इमानि च महार्हाणि वस्त्राण्याभरणानि च।
प्रतिगृह्य विशालाक्ष मातुलस्य च दापय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'बड़े नेत्रों वाले राजकुमार! कृपया इन बहुमूल्य वस्त्रों और आभूषणों को स्वयं स्वीकार करें और अपने मामा को भी दें।॥4॥
 
'Big-eyed prince! Please accept these precious clothes and ornaments yourself and give them to your maternal uncle as well.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)