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ramayan 2.70.29: ऊँट, बैल, घोड़े और खच्चरों द्वारा खींचे जाने वाले गोलाकार पहियों वाले सौ से अधिक रथों के साथ सेवक भरत के पीछे-पीछे चल रहे थे।   |   ramayan सर्ग 2.70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.70.29 
रथान् मण्डलचक्रांश्च योजयित्वा पर: शतम्।
उष्ट्रगोऽश्वखरैर्भृत्या भरतं यान्तमन्वयु:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ऊँट, बैल, घोड़े और खच्चरों द्वारा खींचे जाने वाले गोलाकार पहियों वाले सौ से अधिक रथों के साथ सेवक भरत के पीछे-पीछे चल रहे थे।
 
More than a hundred chariots with circular wheels drawn by camels, oxen, horses and mules, the servants followed Bharata on his way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)