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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.70.20 
अन्त:पुरेऽतिसंवृद्धान् व्याघ्रवीर्यबलोपमान्।
दंष्ट्रायुक्तान् महाकायान् शुनश्चोपायनं ददौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
केकयनार ने भरत को अनेक कुत्ते भी भेंट किए, जो हरम में पाले गए थे और जो बल और वीरता में बाघों के समान थे, जिनके बड़े-बड़े दाढ़ और विशाल शरीर थे।
 
Kekayanares also presented to Bharat a number of dogs, who had been brought up in the harem and were like tigers in strength and valour, with large molars and huge bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)