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ramayan 2.70.19: यह कहकर केकयनरेश ने भरत का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें अनेक सुन्दर हाथी, विचित्र कालीन, मृगचर्म और बहुत-सा धन दिया।   |   ramayan सर्ग 2.70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.70.19 
तस्मै हस्त्युत्तमांश्चित्रान् कम्बलानजिनानि च।
सत्कृत्य केकयो राजा भरताय ददौ धनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर केकयनरेश ने भरत का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें अनेक सुन्दर हाथी, विचित्र कालीन, मृगचर्म और बहुत-सा धन दिया।
 
Saying this, Kekayanaresha welcomed Bharata warmly and gave him many fine elephants, strange carpets, deerskin and a lot of wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)