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ramayan 2.7.29: 'पुत्र! तुम तो सदा सुख भोगने में समर्थ हो, किन्तु जो राजा अपने हृदय में पाप रखता है और बाहर से झूठी सांत्वना देता है, उसने अपने राज्य पर भगवान राम को स्थापित करने का विचार करके आज तुम्हें तुम्हारे बन्धुओं सहित मृत्यु के मुख में डाल दिया है।   |   ramayan सर्ग 2.7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.7.29 
पापेनानृतसान्त्वेन बाले नित्यं सुखोचिता।
रामं स्थापयता राज्ये सानुबन्धा हता ह्यसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'पुत्र! तुम तो सदा सुख भोगने में समर्थ हो, किन्तु जो राजा अपने हृदय में पाप रखता है और बाहर से झूठी सांत्वना देता है, उसने अपने राज्य पर भगवान राम को स्थापित करने का विचार करके आज तुम्हें तुम्हारे बन्धुओं सहित मृत्यु के मुख में डाल दिया है।
 
'Child! You are capable of enjoying happiness forever, but the king who keeps sin in his heart and gives false consolation from the outside, has today put you along with your relatives in the jaws of death, by thinking of installing Lord Rama on his kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)