Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.7.21: 'यह समाचार पाकर मैं शोक और शोक से अभिभूत हो गया हूँ और अपार भय के समुद्र में डूब गया हूँ। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मैं चिंता की अग्नि में जल रहा हूँ और यहाँ आपके हित की बात कहने आया हूँ।'॥21॥ | ramayan सर्ग 2.7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'यह समाचार पाकर मैं शोक और शोक से अभिभूत हो गया हूँ और अपार भय के समुद्र में डूब गया हूँ। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मैं चिंता की अग्नि में जल रहा हूँ और यहाँ आपके हित की बात कहने आया हूँ।'॥21॥
'On receiving this news I am overwhelmed with grief and sorrow and have drowned in the sea of immense fear. I feel as if I am burning in the fire of worry and have come here to tell you something that is for your benefit.'॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥