Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.7.13: मन्थरा ने देखा कि कैकेयी के लिए यह बात बुरी है। वह क्रोध से जल उठी। वह महल में लेटी हुई कैकेयी के पास गई और बोली -॥13॥   |   ramayan सर्ग 2.7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.7.13 
सा दह्यमाना क्रोधेन मन्थरा पापदर्शिनी।
शयानामेव कैकेयीमिदं वचनमब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मन्थरा ने देखा कि कैकेयी के लिए यह बात बुरी है। वह क्रोध से जल उठी। वह महल में लेटी हुई कैकेयी के पास गई और बोली -॥13॥
 
Manthra saw that this was bad for Kaikeyi. She was burning with anger. She went to Kaikeyi who was lying in the palace and said this -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)