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ramayan 2.69.6: तब एक प्रिय मित्र ने मित्रों से घिरे हुए अपने मित्रों के बीच बैठे हुए भरत से पूछा - 'मित्रो! आज तुम लोग प्रसन्न क्यों नहीं हो?'॥6॥   |   ramayan सर्ग 2.69: भरत की चिन्ता, मित्रों द्वारा उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास तथा उनके पूछने पर भरत का मित्रों के समक्ष अपने देखे हुए भयंकर दुःस्वप्न का वर्णन करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 69: भरत की चिन्ता, मित्रों द्वारा उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास तथा उनके पूछने पर भरत का मित्रों के समक्ष अपने देखे हुए भयंकर दुःस्वप्न का वर्णन करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.69.6 
तमब्रवीत् प्रियसखो भरतं सखिभिर्वृतम्।
सुहृद्भि: पर्युपासीन: किं सखे नानुमोदसे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब एक प्रिय मित्र ने मित्रों से घिरे हुए अपने मित्रों के बीच बैठे हुए भरत से पूछा - 'मित्रो! आज तुम लोग प्रसन्न क्यों नहीं हो?'॥6॥
 
Then a dear friend, sitting surrounded by friends, asked Bharat sitting among his friends – 'Friends! Why are you not happy today?' 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)