श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.68.8 
मा चास्मै प्रोषितं रामं मा चास्मै पितरं मृतम्।
भवन्त: शंसिषुर्गत्वा राघवाणामित: क्षयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'श्री राम के वनवास और उनके पिता की मृत्यु का समाचार भरत को मत बताना और इन परिस्थितियों के कारण रघुवंशियों में जो हलचल मची है, उसका भी उल्लेख मत करना॥ 8॥
 
'Do not tell Bharata about Shri Rama's exile and the death of his father. And do not mention the commotion that has been created among the Raghuvanshis due to these circumstances.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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