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श्लोक 2.68.5  |
एहि सिद्धार्थ विजय जयन्ताशोकनन्दन।
श्रूयतामितिकर्तव्यं सर्वानेव ब्रवीमि व:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| ‘सिद्धार्थ! विजय! जयन्त! अशोक! और नंदन! तुम सब लोग यहाँ आकर जो कार्य करना है, उसे सुनो। मैं तुम सबको बता रहा हूँ॥5॥ |
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| ‘Siddhartha! Vijay! Jayant! Ashok! And Nandan! All of you come here and listen to the work you have to do. I am telling all of you.॥ 5॥ |
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