श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.68.5 
एहि सिद्धार्थ विजय जयन्ताशोकनन्दन।
श्रूयतामितिकर्तव्यं सर्वानेव ब्रवीमि व:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘सिद्धार्थ! विजय! जयन्त! अशोक! और नंदन! तुम सब लोग यहाँ आकर जो कार्य करना है, उसे सुनो। मैं तुम सबको बता रहा हूँ॥5॥
 
‘Siddhartha! Vijay! Jayant! Ashok! And Nandan! All of you come here and listen to the work you have to do. I am telling all of you.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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