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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना
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श्लोक 4
श्लोक
2.68.4
गच्छन्त्विति तत: सर्वे वसिष्ठं वाक्यमब्रुवन्।
तेषां तद् वचनं श्रुत्वा वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥ ४॥
अनुवाद
इस पर सबने वसिष्ठजी से कहा, ‘हाँ, दूत अवश्य भेजने चाहिए।’ उनकी बात सुनकर वसिष्ठजी ने दूतों को संबोधित करके कहा, ‘॥4॥
On this everyone said to Vasishtha, 'Yes, messengers must be sent.' On hearing their statement Vasishtha addressed the messengers and said, '॥ 4॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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