श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.68.3 
तच्छीघ्रं जवना दूता गच्छन्तु त्वरितं हयै:।
आनेतुं भ्रातरौ वीरौ किं समीक्षामहे वयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'इसके अलावा हम और क्या सोच सकते हैं कि घोड़ों पर सवार तेज दूत उन दो बहादुर भाइयों को बुलाने के लिए यहां से तुरंत रवाना हो जाएं?'
 
'What else can we think of except that swift messengers on horses should leave from here quickly to summon those two brave brothers?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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