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ramayan 2.68.22: वे दूत, जो प्रजा की रक्षा करने तथा भरत को राजा दशरथ के कुल का सिंहासन स्वीकार कराने के लिए तत्पर थे, बड़ी शीघ्रता से चल पड़े और रात्रि में ही नगर में पहुँच गए।   |   ramayan सर्ग 2.68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.68.22 
भर्तु: प्रियार्थं कुलरक्षणार्थं
भर्तुश्च वंशस्य परिग्रहार्थम्।
अहेडमानास्त्वरया स्म दूता
रात्र्यां तु ते तत्पुरमेव याता:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे दूत, जो प्रजा की रक्षा करने तथा भरत को राजा दशरथ के कुल का सिंहासन स्वीकार कराने के लिए तत्पर थे, बड़ी शीघ्रता से चल पड़े और रात्रि में ही नगर में पहुँच गए।
 
Those messengers, who were ready to protect the subjects and to make Bharata accept the throne of King Dasharatha's family, set out in great haste and reached the city in the night itself.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डेऽष्टषष्टितम: सर्ग:॥ ६८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें अरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)