श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.68.17 
अभिकालं तत: प्राप्य तेजोऽभिभवनाच्च्युता:।
पितृपैतामहीं पुण्यां तेरुरिक्षुमतीं नदीम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से तेजोभिभवन नामक ग्राम से होते हुए वे अभिकाल नामक ग्राम में पहुँचे और वहाँ से आगे बढ़कर उन्होंने राजा दशरथ के पूर्वजों द्वारा सेवित पवित्र इक्षुमती नदी को पार किया॥17॥
 
From there, passing through a village called Tejobhibhavan, they reached a village called Abhikaal, and from there, proceeding further, they crossed the holy river Ikshumati, served by the ancestors of King Dasharatha.॥17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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