श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.68.16 
निकूलवृक्षमासाद्य दिव्यं सत्योपयाचनम्।
अभिगम्याभिवाद्यं तं कुलिङ्गां प्राविशन् पुरीम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
शारदण्डा के पश्चिमी तट पर एक दिव्य वृक्ष था, जिस पर एक देवता निवास करते थे; अतः वहाँ जो भी प्रार्थना की जाती थी, वह सफल होती थी, इसलिए उसका नाम सत्योपयाचन पड़ा। उस पूजनीय वृक्ष के पास पहुँचकर दूतों ने उसकी परिक्रमा की और वहाँ से आगे बढ़कर कुलिंग नामक नगर में प्रवेश किया।
 
There was a divine tree on the western bank of Shardanda, on which resided a deity; therefore whatever prayers were offered there, would come true (successful), hence it was named Satyaopyachan. Reaching near that venerable tree, the messengers circumambulated it and from there onwards they went further and entered the city named Kulinga.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas