श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.68.10 
दत्तपथ्यशना दूता जग्मु: स्वं स्वं निवेशनम्।
केकयांस्ते गमिष्यन्तो हयानारुह्य सम्मतान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
केकय देश को जाने वाले दूत अपना मार्ग-व्यय लेकर अच्छे घोड़ों पर सवार होकर अपने-अपने घर चले जाते थे।
 
The messengers going to the country of the Kekayas took their travel expenses and went to their respective homes on good horses.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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