श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 68: वसिष्ठजी की आज्ञा से पाँच दूतों का अयोध्या से केकयदेश के राजगृह नगर में जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.68.1 
तेषां तद् वचनं श्रुत्वा वसिष्ठ: प्रत्युवाच ह।
मित्रामात्यजनान् सर्वान् ब्राह्मणांस्तानिदं वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय आदि के ऐसे वचन सुनकर महर्षि वसिष्ठ ने अपने मित्रों, मन्त्रियों तथा समस्त ब्राह्मणों को इस प्रकार उत्तर दिया -॥1॥
 
Hearing such words from Mārkaṇḍeya and others, Sage Vasiṣṭha replied to his friends, ministers and all those Brāhmaṇas thus -॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas