vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध
»
श्लोक 9
श्लोक
2.67.9
नाराजके जनपदे विद्युन्माली महास्वन:।
अभिवर्षति पर्जन्यो महीं दिव्येन वारिणा॥ ९॥
अनुवाद
'जिस प्रदेश में राजा नहीं होता, वहाँ बिजली की मालाओं से सुशोभित गरजने वाले मेघ भी पृथ्वी पर दिव्य जल नहीं बरसाते॥9॥
'In a region where there is no king, the loud thundering clouds decorated with garlands of lightning do not rain celestial water on the earth.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×