vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध
»
श्लोक 6
श्लोक
2.67.6
स्वर्गस्थश्च महाराजो रामश्चारण्यमाश्रित:।
लक्ष्मणश्चापि तेजस्वी रामेणैव गत: सह॥ ६॥
अनुवाद
‘महाराज दशरथ स्वर्ग को चले गए। श्री रामचन्द्रजी वन में रहने लगे और तेजस्वी लक्ष्मण भी श्री राम के साथ चले गए।॥6॥
‘Maharaj Dasharath went to heaven. Shri Ramchandraji started living in the forest and the brilliant Lakshmana also went with Shri Ram.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×