श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.67.38 
स न: समीक्ष्य द्विजवर्य वृत्तं
नृपं विना राष्ट्रमरण्यभूतम्।
कुमारमिक्ष्वाकुसुतं तथान्यं
त्वमेव राजानमिहाभिषेचय॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! इस समय हमारे आचरण को देखकर तथा राजा के अभाव में वन बन चुके इस देश को देखकर आप इक्ष्वाकुवंश के किसी राजकुमार को अथवा किसी अन्य योग्य पुरुष को राजा पद पर अभिषिक्त कीजिए। ॥38॥
 
'Therefore, O great Brahmin, seeing our behaviour at this time and looking at this country which has become a forest in the absence of a king, please anoint a prince from the Ikshvaku dynasty or any other capable person as the king.' ॥ 38॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे सप्तषष्टितम: सर्ग:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)