श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.67.21 
नाराजके जनपदे शरान् संततमस्यताम्।
श्रूयते तलनिर्घोष इष्वस्त्राणामुपासने॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'राजाविहीन राज्य में लक्ष्य पर निरन्तर बाण चलाते हुए धनुष की डोरी और धनुर्विद्या का अभ्यास करते योद्धाओं के हाथों की ध्वनि सुनाई नहीं देती।
 
'In a kingdom without a king, the sound of the bowstring and the hands of the warriors practicing archery cannot be heard while continuously shooting arrows at the target.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)