vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध
»
श्लोक 17
श्लोक
2.67.17
नाराजके जनपदे तूद्यानानि समागता:।
सायाह्ने क्रीडितुं यान्ति कुमार्यो हेमभूषिता:॥ १७॥
अनुवाद
'जिस देश में राजा नहीं है, वहाँ स्वर्ण-आभूषणों से सुसज्जित युवतियाँ सायंकाल के समय उद्यानों में क्रीड़ा करने के लिए एकत्र नहीं होतीं।॥17॥
'In a region without a king, the maidens adorned with golden ornaments do not gather together to play in the gardens in the evening.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×