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ramayan 2.66.17: उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उसने अपनी बाँहें ऊपर उठाईं और करुण स्वर में रोने और दुःख में विलाप करने लगी।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.66.17 
बाहूनुच्छ्रित्य कृपणा नेत्रप्रस्रवणैर्मुखै:।
रुदत्य: शोकसंतप्ता: कृपणं पर्यदेवयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उसने अपनी बाँहें ऊपर उठाईं और करुण स्वर में रोने और दुःख में विलाप करने लगी।
 
Tears were streaming down her face from her eyes. She raised her arms and began to weep pitifully and to wailing in grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)