श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 65: वन्दीजनों का स्तुतिपाठ, राजा दशरथ को दिवंगत हुआ जान उनकी रानियों का करुण-विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.65.21 
तासामाक्रन्दशब्देन सहसोद्‍गतचेतने।
कौसल्या च सुमित्रा च त्यक्तनिद्रे बभूवतु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनके रोने की ध्वनि सुनकर कौशल्या और सुमित्रा की नींद खुल गई और वे दोनों अचानक जाग उठीं ॥ 21॥
 
The sound of their crying woke Kausalya and Sumitra up from their sleep and they both suddenly woke up. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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