श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 65: वन्दीजनों का स्तुतिपाठ, राजा दशरथ को दिवंगत हुआ जान उनकी रानियों का करुण-विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.65.16 
कौसल्या च सुमित्रा च पुत्रशोकपराजिते।
प्रसुप्ते न प्रबुध्येते यथा कालसमन्विते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कौशल्या और सुमित्रा अपने पुत्रों के वियोग से शोक से व्याकुल होकर मृतात्माओं के समान सो गईं और तब तक नहीं उठीं॥16॥
 
Kausalya and Sumitra, overcome with grief for the loss of their sons, fell asleep like dead persons and had not woken up till then.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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