श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 65: वन्दीजनों का स्तुतिपाठ, राजा दशरथ को दिवंगत हुआ जान उनकी रानियों का करुण-विलाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.65.10 
सर्वलक्षणसम्पन्नं सर्वं विधिवदर्चितम्।
सर्वं सुगुणलक्ष्मीवत् तदभूदाभिहारिकम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल राजा के सौभाग्य के लिए जो वस्तुएँ लाई जाती थीं, उन्हें आभिहारिक कहते हैं। वहाँ लाई गई समस्त आभिहारिक सामग्री सभी शुभ लक्षणों से युक्त, विधिपूर्वक, उत्तम गुणों से युक्त, आदर और प्रशंसा के योग्य तथा सुन्दर होती थी।॥10॥
 
The things brought in the morning for the good fortune of the king are called Aabhiharik. All the Aabhiharik materials brought there were endowed with all auspicious signs, in accordance with the rules, were endowed with excellent qualities, worthy of respect and praise, and were beautiful.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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