श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 64: राजा दशरथ का अपने द्वारा मुनि कुमार के वध से दुःखी हुए उनके मातापिता के विलाप और उनके दिये हुए शाप का प्रसंग सुनाकर अपने प्राणों को त्याग देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.64.8 
यन्निमित्तमिदं तात सलिले क्रीडितं त्वया।
उत्कण्ठिता ते मातेयं प्रविश क्षिप्रमाश्रमम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! तुम इतनी देर से जल में खेल रहे हो, इस कारण तुम्हारी माता तुम्हारे लिए चिन्तित हो गयी है; अतः तुम शीघ्र आश्रम में प्रवेश करो।
 
"Son! Because of the reason you have been playing in the water for so long, your mother has become anxious for you; therefore, please enter the ashram quickly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)